डेयरी व्यवसाय से लाभ कैसे मिलेगा?

डेयरी व्यवसाय से लाभ कैसे मिलेगा?

डेयरी किसानों की सबसे बड़ी समस्या है कि जो दूध वह उत्पादित करते हैं, उन्हें बाज़ार में उसका खरीदार ही नहीं मिलता और अगर खरीदार मिल भी गया तो इसका पूरा मूल्य नहीं मिलता. किसानों की शिकायत है कि वे प्रति लीटर दूध उत्पादन पर अधिक खर्च करते हैं किन्तु उन्हें इसका लागत मूल्य भी नहीं मिलता. आइए, आज हम आपकी इस समस्या का हल निकालने की कोशिश करते हैं.

यह बात तो सही है कि नई तकनीकियाँ आने के बाद हमारे किसान उन्नति की राह में पीछे छूट रहे हैं. अब यह तो संभव ही नहीं है कि हम अपने किसानों को रातों-रात शिक्षित बना दें लेकिन उन्हें कुछ ऐसा अवश्य ही करना चाहिए जैसे आजकल हमारे शिक्षित नौजवान अपना काम कर रहे हैं.

गाय की डेयरी से हमें कई प्रकार के उत्पाद एवं उपोत्पाद प्राप्त होते हैं. इनमें दूध, गोबर, मूत्र तथा बचा हुआ घास-फूस आदि प्रमुख हैं. अगर आप अपने पशुओं का गोबर बेचेंगे तो संभव है कोई खरीदने को ही तैयार न हो. अगर कोई खरीदार मिल भी गया तो वह इसके मामूली दाम ही देगा. यही हाल दूध का है. दूध में बढ़ती हुई मिलावट की प्रवृत्ति ने ईमानदार किसानों को भी कहीं का नहीं छोड़ा है. जो किसान स्वच्छ दुग्ध-उत्पादन करते हैं उन्हें दूध बेचने में कोई विशेष परेशानी नहीं होती. कई लोग दूध निकालते समय सफाई आदि का ध्यान नहीं रखते, जिससे इसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है.

बड़ी डेयरियों के टैंकर तो हज़ारों लीटर दूध खरीदते हैं जिसमें थोडा बहुत खराब भी खप जाता है. छोटे डेयरी मालिकों के लिए ऐसा करना संभव नहीं है. दूध की मात्रा इतनी कम होती है कि कोई दूध खरीदने वाला इन तक नहीं पहुँच पाता. दूध जल्द ही खराब होने वाला आहार है, अतः निकलने के तुरंत बाद ही इसका प्रसंस्करण करना आवश्यक होता है. ऐसा करने से दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है अर्थात यह अधिक देर तक खराब हुए बिना रह सकता है. डेयरी किसानों को अपनी डेयरी में लगाए निवेश का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए.

• गोबर को व्यर्थ फैंकने से बेहतर है कि इसके उपले बना कर बेचे जाएं ताकि अधिक मूल्य प्राप्त हो.
• बचे-खुचे भूसे, मॉल-मूत्र एवं चारा अवशेषों को गला-सड़ा कर केंचुओं की सहायता से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है. इसकी बाज़ार में मांग बहुत अच्छी है तथा यह सात से आठ रूपए प्रति किलोग्राम की दर से बेची जा सकती है.
• जिन किसानों के पास अपने संसाधन हैं वे चाहें तो गोबर गैस प्लांट भी लगा सकते हैं जिससे डेयरी की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति मुफ्त में हो सकती है.
• स्वच्छ दुग्ध-उत्पादन करें ताकि साफ़-सुथरे और मिलावट रहित दूध को देख कर ग्राहक जल्दी से खरीदने की सोचे.
• जो लोग शहरों से अधिक दूर नहीं रहते, वे दूध से खोया तैयार करके हलवाइयों को बेच सकते हैं जो अत्यंत लाभकारी है. मैंने मथुरा और आगरा के आसपास बहुत से डेयरी किसानों को ऐसा करते हुए देखा हैं.
• दूध से पनीर बनाना भी आसान है जिसे आप स्वयं अथवा सब्जी वालों के माध्यम से अच्छे दाम में बेच सकते हैं. आजकल होटलों और ढाबों में भी इसकी खूब मांग है.
• अगर आपके आस-पास छोटी डेयरियाँ हों तो आप अपने पशुओं के दूध की फैट निकलवा सकते हैं जिसे ‘क्रीम’ कहा जाता है. यह क्रीम या तो लोकल डेयरी वाले खरीद लेते हैं या फिर आप इस क्रीम से मक्खन एवं घी तैयार करके बेच सकते हैं.
• उपर्युक्त वर्णित सभी उत्पाद तैयार करने में कोई ज्यादा मेहनत नहीं है परन्तु मुनाफा अच्छा मिल सकता है. डेयरी के काम में अगर साख अच्छी हो तो ग्राहक आपके द्वार पर लाइन लगा कर खड़े रहते हैं क्योंकि अच्छी चीज़ की सभी कद्र करते हैं.
• अगर आप प्रतिदिन दो सौ लीटर से अधिक दूध उत्पादित करते हैं तो एक चिल्लिंग टैंक रखा जा सकता है ताकि दूध अधिक समय तक खराब न हो. ऐसी डेयरियों को कई बड़ी कम्पनियां अनुदान एवं सहायता भी देती हैं तथा ये बदले में सारा दूध खरीद लेती हैं.
• गाँव के छोटे किसान मिल कर अपनी सहकारी संस्था भी बना सकते हैं ताकि शहर के लोग छोटा समझ कर आपका शोषण न कर सकें. सारे गाँव का दूध एक स्थान पर इकठ्ठा करके अच्छे दामों में बेचा जा सकता है.
• डेयरी पशुओं हेतु यथा संभव नई तकनीकी अपनाएं ताकि आपका व्यवसाय अधिक साफ़-सुथरा एवं लाभकारी बन सके. पुराने समय में दूध की मांग अधिक थी परन्तु कोई बेचने वाला नहीं था. आजकल परिस्थितियाँ बदल रही हैं. दूध की मांग के साथ-साथ इसका उत्पादन बहुत बढ़ गया है.
• कई लोग अपनी डेयरी को इतना सुन्दर तथा आकर्षक बनाते हैं कि वे इसे लोगों को दिखाने के लिए भी रूपए वसूल करते हैं. क्या आपकी डेयरी में कोई ऐसा आकर्षण है?
• अगर डेयरी अच्छी हो तो दूध भी अच्छा होगा और आप दूध के लिए मुँह-मांगे दाम प्राप्त कर सकते हैं. आखिर कोई तो बात है जो भाग्य-लक्ष्मी जैसी डेयरी गाय के दूध को अस्सी रूपए प्रति लीटर तक बेच सकती है जबकि हमारे किसान पच्चीस-तीस रूपए तक भी मुश्किल से पहुँच पाते हैं!
आशा है कि आप उपर्युक्त वर्णित बातों पर ध्यान देते हुए ही अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाएंगे. ऐसा करने से सफलता अवश्य ही आपके कदम चूमेगी, मुझे विश्वास है!

Comments

Popular posts from this blog

Advertiser Listing 2011-12

All India Dairy Business Directory 2010-11 - Advertisers